Movie Review

Titu Ambani Movie Review | मजेदार संवाद और ट्विस्ट्स से भरी है टीटू और मौसमी की ये प्रेम कहानी, दीपिका सिंह ने जीता दिल | Navabharat (नवभारत)


टीटू अंबानी पोस्टर (Photo Credits: Instagram)

टीटू अंबानी पोस्टर (Photo Credits: Instagram)

इस हफ्ते दिया और बाती फेम ऐक्ट्रेस दीपिका सिंह गोयल बड़े पर्दे पर अभिनय की शुरुआत कर रही हैं। फिल्म में उनके अपोजिट आश्रम फ़ेम तुषार पांडेय नजर आएंगे। कैसी है फिल्म चलिए जानते हैं।

बैनर : सबल प्रोडक्शन 

कलाकार : दीपिका सिंह , तुषार पांडेय , रघुबीर यादव , वीरेंद्र सक्सेना 

निर्माता : महेंद्र विजयदान देथा, दिनेश कुमार 

निर्देशक : रोहित राज गोयल 

अवधि : 121 मिनट

 सेंसर : यू / ए 

 रेटिंग्स: ⭐⭐⭐ 

इस हफ्ते  दिया और बाती फेम ऐक्ट्रेस दीपिका सिंह गोयल बड़े पर्दे पर अभिनय की शुरुआत कर रही हैं। फिल्म में उनके अपोजिट आश्रम फ़ेम तुषार पांडेय नजर आएंगे। कैसी है फिल्म चलिए जानते हैं।

कहानी 

टीटू ( तुषार पांडेय) के पिता शुक्ला जी ( रघुबीर यादव ) को एक बार फिर पता चलता है कि टीटू ने नयी नौकरी छोड़ दी है। टीटू को लगता है कि वह दस या पंद्रह हजार की नौकरी करने के लिए नहीं बना है। उसे तो बिजनेस करके बड़ा आदमी बनना है। मौसमी ( दीपिका सिंह) अपने माँ पिता की इकलौती जिम्मेदार बेटी है। मौसमी टीटू से बहुत प्यार करती है लेकिन टीटू अपने नए नए बिजनेस आइडिया के चलते अभी शादी की बात करने के लिए तैयार नहीं हैं। मौसमी के माँ पिता अपनी बेटी की शादी के लिए चिंतित हैं। टीटू कैटरिंग का नया बिजनेस शुरू करता है लेकिन एक बार फिर उसे नुकसान हो जाता है। साजन चतुर्वेदी ( बिजेंद्र कला ) की सलाह पर टीटू की शादी मौसमी से तय कर दी जाती है कि एक बार शादी हो जाएगी तो टीटू समझदार जिम्मेदार बन जाएगा। हिंदी फ़िल्मों में कहानी के इस मोड़ पर हैप्पी एंडिंग हो जाती है लेकिन यहां कहानी तो शुरू होती है। सरकारी नौकरी करने वाली  अपनी पत्नी मौसमी के द्वारा टीटू बैंक से लोन लेना चाहता है और मौसमी इस लोन के लिए सहमत नहीं है। टीटू और मौसमी के रिश्ते में आई कड़वाहट का क्या अंत होता है। इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

अभिनय 

फ़िल्म में दीपिका सिंह का अभिनय प्रभावशाली है। टीवी पर एक लम्बी सफल भूमिका निभाने वाली दीपिका सिंह ने मौसमी के किरदार को एक नया रंग दिया है। टीटू  के किरदार में तुषार पांडेय प्रभावित करते हैं। यह उनकी पहली लीड भूमिका की फ़िल्म है। वह दर्शकों की उम्मीद पर खरा उतरते हैं। रघुबीर यादव एक परेशान पिता शुक्ला जी भी भूमिका में गुदगुदाते हैं। विजेंदर सक्सेना एक मजबूर और आर्थिक कमजोर लड़की के पिता के किरदार को जीवंत कर देते हैं। फ़िल्म के अन्य कलाकारों ने अपने किरदार के साथ न्याय किया है।

डायरेक्शन 

लेखक निर्देशक रोहित राज गोयल के निर्देशन में बहुत परिपक्वता है। फ़िल्म में उनका ड्रामा बहुत स्वाभाविक लगता है। हम छोटे शहरों के परिवार में इस तरह का माहौल देखते रहे हैं। रोहित फ़िल्म में अपने किरदारों के माध्यम से मध्यम परिवार की सिंपल लव स्टोरी को पर्दे पर दिखाने में कामयाब रहे हैं। एक लव स्टोरी के साथ ही फ़िल्म में लड़कियों के अपने माँ और पिता के प्रति जिम्मेदारी को बहुत ही सहज तरीके से दिखाने में सफल रहे हैं। 

क्या है सबसे बढ़िया 

इस फ़िल्म का संवाद है क्या लड़कियां अपने माँ और पिता के लिए श्रवण कुमार नहीं बन सकती। इस नए आइडिया के आसपास मौसमी और टीटू की प्रेम कहानी फ्रेश लगती है। फ़िल्म के कई संवाद असरदार हैं। फ़िल्म के दृश्य में जहां भी हास्य फीका पड़ता है, फ़िल्म के संवाद आपको हँसाते हैं। वास्तव में फ़िल्म का प्लाट एक गंभीर विषय पर है लेकिन निर्देशक ने इसे एक मनोरंजक तरीके से दर्शकों तक पहुंचने में कामयाब रहे हैं।