22 Years Of Fiza: ‘फिजा’ (Fiza) फिल्म रिलीज हुए 22 साल बीत गए हैं. हाल ही में रिलीज हुई विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को कश्मीर की समस्या पर्दे पर दिखाने के लिए सराहा गया. इस समय सफल फिल्मों के लिए तरसते बॉलीवुड के लिए ये फिल्म एक राहत की तरह है. ऐसा नहीं है कि पहली बार सिल्वर स्क्रीन पर आतंकवाद के दलदल में फंसे कश्मीर की समस्या को दिखाया गया है. 22 साल पहले 8 सितंबर 2000 में रिलीज हुई फिल्म ‘फिजा’ (Fiza) में भी कश्मीर समस्या को ही दिखाया गया था. हां ये अलग बात है कि आतंकवाद मेन थीम थी लेकिन कहानी कुछ अलग थी. इस फिल्म ने सिनेमाघर में बैठे दर्शकों को सन्न कर दिया था.
खालिद मोहम्मद के निर्देशन में बनी फिल्म ‘फिजा’ में दिखाया गया था कि किस तरह एक हंसता खेलता परिवार आतंकवाद की भेंट चढ़ जाता है, कैसे आतंक के अंधेरे रास्ते पर नौजवानों को भटका देता है. जब तक इसका एहसास होता है तब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं बचा होता. कश्मीर समस्या पर बनी इस फिल्म ने दर्शकों को प्रभावित किया था.
फिजा में करिश्मा कपूर ने कमाल की एक्टिंग की थी. (फोटो साभार; Poster)
‘फिजा’ ने बॉक्स ऑफिस पर खूब कमाई की थी
मल्टी स्टार फिल्म ‘फिजा’ में ऋतिक रोशन करिश्मा कपूर , ईशा कोप्पिकर, जया बच्चन महत्वपूर्ण रोल में जबकि सुष्मिता सेन गेस्ट अपीयरेंस में थीं. 22 साल पहले इस फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई की थी. ईशा ने इसी फिल्म से बॉलीवुड डेब्यू किया था. ऋतिक के करियर की दूसरी फिल्म थी, ऋतिक ने अमन नामक नौजवान के रोल में थे. लीड रोल में करिश्मा थी जिसने फिजा नामक लड़की का किरदार निभाया था. खालिद ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘करिश्मा ने अपने रोल में जान फूंक दिया था. उन्हें सिर्फ सीन बताना पड़ता था वह कैमरा ऑन होते ही अपने किरदार को जीने लगती थी’.
प्रदीप गुहा ने दिखाई थी कड़वी सच्चाई
आतंकवादियों के बहकावे में आने वाले नौजवानों की कहानी को सिल्वर स्क्रीन पर दिखा कर प्रदीप ने दर्शकों को एक कड़वी सच्चाई से रुबरू करवाया था. खालिद मोहम्मद के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने दर्शकों को खूब रुलाया भी था. ‘फिजा’ फिल्म में दिखाया गया है कि एक मासूम और पढ़ाकू लड़का अमन (ऋतिक रोशन) कश्मीर के आतंकवादियों के बहकावे में आकर गुनाह करने लगता है.
आतंकवाद की जद में बर्बाद होते परिवार की कहानी ‘फिजा’.
फिल्म में करिश्मा ने ऋतिक को मार दी थी गोली
एक दिन जब ऋतिक गायब हो जाता है तो घरवाले मान लेते हैं कि आतंकवादियों ने उसे मार दिया. लेकिन बहन करिश्मा नहीं मानती है और भाई को खोजने निकल पड़ती है. लेकिन जब भाई से सामना होता है तो वह एक आतंकी के रुप में सामने दिखता है. अपने भाई को समझाबुझा कर घर लौटने को कहती है लेकिन वह नहीं मानता है. कहानी आगे बढ़ती है और बहन अपने भाई को गोली मार देती है. इस फिल्म ने सिनेमाघर में बैठे दर्शकों को हिला कर रख दिया था.
‘फिजा’ की सफलता में संगीत का विशेष योगदान
इस फिल्म की कहानी, पिक्चराइजेशन से लेकर संगीत सब कुछ इतना कमाल था कि दर्शक इसे आज भी याद रखते हैं. इस फिल्म में संगीत अनु मलिक ने दिया था. यूं तो सुष्मिता सेन ने कई फिल्मों में काम किया है लेकिन इस फिल्म में सिर्फ एक गाने की वजह से उन्हें याद किया जाता है. इस फिल्म का गाना ‘महबूब मेरे, महबूब मेरे’ जबरदस्त हिट हुआ था. सुष्मिता सेन पर फिल्माया गया यह गाना जब सिल्वर स्क्रीन पर आया तो धमाल मचा दिया था. लेकिन सुष्मिता ने इस गाने को करने से पहले इनकार कर दिया था.
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सुष्मिता सेन सिर्फ एक गाना कर छा गई थीं
दरअसल, पहले इस गाने में एक लाइन थी ‘आ गर्मी ले मेरे सीने से’, इस लाइन को सुनने के बाद सुष्मिता ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि मैं इसे नहीं कर पाऊंगी लेकिन फिल्म निर्देशक खालिद इस गाने को सुष्मिता पर ही फिल्माना चाहते थे. ऐसे में अनु मलिक ने लिरिक्स में बदलाव कर इसे ‘आ नर्मी ले मेरी आंखों से किया’. सुष्मिता सेन के इस गाने पर स्टेप्स काफी फेमस हुए थे जिसकी कोरियाग्राफी गणेश हेगड़े ने किया था और आवाज सुनिधि चौहान ने दी थी. ये गाना इतना जबरदस्त हिट हुआ था कि आज भी सुष्मिता के हिट्स में शामिल है.
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FIRST PUBLISHED : September 08, 2022, 07:00 IST





