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Throwback: साहिर लुधियानवी की खातिर सुधा मल्होत्रा ने एक गाने की 24 घंटे में तैयार कर दी थी धुन, किस्सा है दिलचस्प


Throwback: हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई नाम ऐसे हैं जो समय के साथ गुमनामी के अंधेरे में खो गए हैं. नए जमाने के लोग उन्हें कम ही जानते हैं या यूं कह सकते हैं कि नहीं ही जानते हैं. ऐसी ही एक मशहूर प्लेबैक सिंगर थीं सुधा मल्होत्रा (Sudha malhotra). सुधा एक ऐसा नाम है जो अधिकांश श्रोताओं के लिए अनजाना है, लेकिन कई फिल्मों में अपनी आवाज दे चुकीं सुधा ने सिर्फ गायिकी ही नहीं बल्कि अभिनय भी किया था. 1982 में राज कपूर (Raj Kapoor) की आई फिल्म ‘प्रेम रोग’ (Prem Rog) का गाना ‘ये प्यार था या कुछ और था’ आखिरी बार गाया था. पचास के दशक में दर्जनों गाने गाने वाली सुधा की आवाज में क्लासिकल बेस था. सिंगर-एक्ट्रेस होने के साथ-साथ साहिर लुधियानवी (Sahir Ludhianvi) की गुजारिश पर ‘दीदी’ फिल्म के  एक गाने की कंपोजर भी बनी थीं. कुछ फिल्में, कुछ नाम, कुछ गीत, कुछ रिश्तों पर समय की धूल पड़ जाती है. चलिए बताते हैं ऐसा ही एक भूला-बिसरा फिल्मी किस्सा.

साहिर लुधियानवी किसी परिचय के मोहताज के नहीं हैं. साहिर एक ऐसे प्रसिद्ध गीतकार थें जिनके लिखे गीतों पर संगीतकार सचिन देव बर्मन, शंकर जयकिशन, खय्याम और एन दत्ता जैसे प्रसिद्ध संगीतकारों ने धुनें बनाईं. ऐसी ही 1959 में आई एक फिल्म ‘दीदी’ के लिए भी गीत लिखा. एन दत्ता ने फिल्म में संगीत दिया था. के नारायण काले के निर्देशन में बनी इस फिल्म में दिग्गज एक्टर सुनील दत्त, शोभा खोटे, फिरोज खान और ललिता पंवार थीं.

‘तुम मुझे भूल जाओ तो ये हक है तुमको’
‘दीदी’ फिल्म  के सारे गानों की कंपोजिंग एन दत्त ने की थी, सिवाय आखिरी और मशहूर गाना ‘तुम मुझे भूल जाओ तो ये हक है तुमको’ को छोड़कर. कम लोगों को पता होगा कि इस गाने की कंपोजिंग सुधा मल्होत्रा ने की थी. दरअसल, जिस दिन इस गाने की रिकॉर्डिंग होनी थी उस दिन एन दत्ता अचानक बीमार पड़ गए. ऐसे में गीतकार साहिर लुधियानवी ने सुधा से बात की तो वह इस गाने की कंपोजिंग के लिए राजी हो गईं और कमाल की बात ये रही है कि उन्होंने मात्र 24 घंटे में शानदार धुन तैयार भी कर ली.

DIDI FILM

‘दीदी’ फिल्म के इस गाने की कंपोजिंग सुधा मल्होत्रा ने की थी. इस फिल्म में सुनील दत्त और शोभा खोटे की जोड़ी थी. (फोटो साभार: Film History Pics/Twitter)

कोमल आवाज की मल्लिका सुधा मल्होत्रा
अगले ही दिन सुधा मलहोत्रा और मुकेश ने इस गाने की रिकॉर्डिंग भी कर ली. ये गाना जबरदस्त हिट हुआ. इस गाने को कंपोज और रिकॉर्ड किए एक जमाना बीत गया लेकिन इसकी कशिश आज भी बरकरार है. सुधा की गायिकी की खासियत थी कि उच्चारण बहुत साफ था, साथ ही शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग की वजह से आवाज में लोच और मधुरता का अनुपम मेल था.

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साहिर ने सुधा से कहा-‘चलो एक बार फिर से अजनबी…’
साहिर लुधियानवी को सुधा मल्होत्रा से काफी लगाव था. कहते हैं कि आजीवन अविवाहित रहे साहिर ने अपने जीवन में अमृता प्रीतम और सुधा मल्होत्रा से प्रेम किया था. हालांकि सुधा ने गिरिधर मोटवानी से शादी कर गाना छोड़ घर गृहस्थी में रम गईं. कहते हैं कि साहिर का लिखा प्रसिद्ध गाना ‘चलो एक बार फिर से अजबनी हो जाए हम’ तब लिखा था जब सुधा की शादी तय हो गई थी.

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