Cinema

जय संतोषी मां: जिस फिल्म के लिए लोगों ने गिरवी रखे बर्तन, जिसके भजनों से मशहूर हुए सी. अर्जुन


शारदीय नवरात्र (Navratri 2022)  की शुरुआत के साथ ही भक्ति गीतों की आवाज कानों तक पहुंचने लगी है. फिल्मी गानों के अलावा भजनों और लोक संगीत भी चारों तरफ बजने लगे हैं. ऐसे में उस धार्मिक फिल्म की याद लाजिमी है, जिसके गाने आज भी फिल्मी भक्ति गानों की लिस्ट में टॉप पर बने रहते हैं. जी हां, हम बात कर रहे हैं फिल्म ‘जय संतोषी मां’  (Jai Santoshi Maa) की. रमेश सिप्पी की ब्लॉक बस्टर ‘शोले’ जिस साल रिलीज हुई थी, उसी साल यह फिल्म पर्दे पर आई थी. यानी साल 1975. ‘शोले’ और ‘जय संतोषी मां’, दोनों ही फिल्मों में कुछ बातें कॉमन थीं, वह यह कि इन फिल्मों की कहानी विशुद्ध काल्पनिक कथाओं से उपजकर रुपहले पर्दे तक आई थी. दोनों बॉक्स ऑफिस पर दमदार उपस्थिति दर्ज कराने वाली फिल्मों में से एक थीं. चर्चा ‘जय संतोषी मां’ की इसलिए, क्योंकि यह ‘शोले’ से कहीं कम बजट और बिना बड़े स्टारों वाली उसके जैसी ही सुपरहिट फिल्म थी.

‘जय संतोषी मां’ ने धार्मिक फिल्मों का ऐसा मुकाम तय कर दिया, जिसे छूना आज भी कठिन है. इस फिल्म को देखने के लिए लोगों ने घर के बर्तन गिरवी रखे. गांवों में तो कर्णफूल यानी कान की बालियां तक गिरवी रखी गईं. यही नहीं, सिनेमाघरों में हफ्तों-महीनों तक यह फिल्म लगातार चली और इस फिल्म के आने के बाद ही संतोषी माता के मंदिर देश में कई जगह स्थापित कर लिए गए. महिलाओं ने शुक्रवार का व्रत रखना शुरू कर दिया. बुक-स्टॉलों पर संतोषी माता की कथा की किताबें बिकने लगीं. विभिन्न मीडिया रपटों के मुताबिक महज 25-30 लाख रुपए की लागत से बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के नए रिकॉर्ड बना दिए. कम बजट, अनदेखे कलाकार और भक्ति वाली कहानी पर बनी ‘जय संतोषी मां’ के बाद कई अन्य निर्माताओं ने धार्मिक फिल्में बनाईं, लेकिन वे इसकी तुलना में सफल नहीं हुए. यहां तक कि साल 2006 में इसी नाम से बनी फिल्म भी टिकट खिड़कियों पर ज्यादा कमाल नहीं कर पाई.

‘जय संतोषी मां’ के सी. अर्जुन

‘करती हूं तुम्हारा व्रत मैं स्वीकार करो मां…’, ‘मैं तो आरती उतारूं रे संतोषी माता की…’, ‘यहां वहां जहां तहां, मत पूछो कहां कहां….’ जैसे गाने कहीं भी बज रहे हों, आपके होंठ सुर में सुर मिलाने लगेंगे. फिल्मी गाने को लोगों की जुबान पर उतारने वाले ऐसे धुनों के रचनाकार थे संगीतकार सी. अर्जुन. विविध भारती पर दिए अपने इंटरव्यू में सी. अर्जुन ने कहा था- इस फिल्म से पहले इंडस्ट्री के लोग मुझे जानते-पहचानते थे, लेकिन ‘जय संतोषी मां’ के गीतों ने मुझे आम जनमानस में पहचान दे दी. संगीतकार सी. अर्जुन की बात सही है. ‘संतोषी मां’ से पहले उन्होंने जितनी फिल्में की या जिन गायक-गायिकाओं से गाने गवाए, वे गीत मशहूर होने से कोसों दूर ही रहे थे. ‘धुनों की यात्रा’ पुस्तक के लेखक पंकज राग ने लिखा है- सी. अर्जुन को गजलों के कम्पोजर के तौर पर जाना जाता था. छोटे बजट की ‘जय संतोषी मां’ ने इस संगीतकार की प्रतिभा से भारतवर्ष का परिचय कराया.

कैसेट बिकने का वह किस्सा

आकाशवाणी के विविध भारती के एक कार्यक्रम में सी. अर्जुन ने ‘संतोषी मां’ से जुड़ा यादगार किस्सा सुनाया था. दरअसल, फिल्म के रिलीज होने के बाद वे हर दिन मुंबई में एक कैसेट बेचने वाले की दुकान पर जाते थे. यह जानने कि ‘जय संतोषी मां’ के गानों के कैसेट बिक रहे हैं या नहीं. सी. अर्जुन को रिलीज के कई दिनों बाद तक निराशा ही हाथ लगी. वे कैसेट विक्रेता से पूछते, उसका रोज एक ही जवाब होता- कोई कैसेट नहीं बिकी. अर्जुन उदास मन से लौट आते. यह सिलसिला कई दिनों तक चला. इस बीच ‘जय संतोषी मां’ छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंच गई. और फिर इसके गाने घरों से लेकर गली-मुहल्लों तक लाउडस्पीकरों से सुने जाने लगे. सी. अर्जुन ने कहा- इस फिल्म के गानों ने ही इसे सुपरहिट बना दिया. संतोषी मां की कृपा से सी. अर्जुन को अब फिल्म इंडस्ट्री से बाहर के लोग भी जानने लगे.

‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ वाले प्रदीप और उषा मंगेशकर

फिल्म ‘जय संतोषी मां’ के गाने लिखे थे कवि प्रदीप ने. वही कवि प्रदीप जिन्होंने मशहूर देशभक्ति गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ लिखा है. जिसे लता मंगेशकर ने जब अपनी आवाज दी तो देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आंखें नम हो गईं. ‘जय संतोषी मां’ के गीत रचयिता कवि प्रदीप ने इस फिल्म के गानों को अपनी आवाज भी दी है.

‘यहां वहां जहां तहां…’ गाना प्रदीप की आवाज में रिकॉर्ड किया गया है. इनके अलावा अधिकतर गाने उषा मंगेशकर ने गाए हैं. मन्ना डे और महेंद्र कपूर के गाए गाने भी खूब मशहूर हुए. बहरहाल, नवरात्रि में आप भी संतोषी माता के भजनों को सुनें और बॉलीवुड की रची इस भक्तिमय फिल्म का आनंद उठाएं.

Tags: Entertainment Special, Entertainment Throwback, Navratri festival

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