Guess Celebs : ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर में दिख रही इस बच्ची के डांस से प्रभावित होकर फिल्म जगत के एक बड़े फिल्ममेकर ने बतौर चाइल्ड एक्ट्रेस फिल्म में कास्ट कर लिया था. जब ये बच्ची बड़ी हुई और फिल्मों में हीरोइन बनने के लिए सोचा तो उसे ये कहकर नकार दिया गया कि हीरोइन वाली बात नहीं है. हालांकि इससे वो मायूसी तो हुई, लेकिन मां के हौसले ने हिम्मत दी और थोड़े ही दिनों के बाद एक फिल्म में बतौर लीड एक्ट्रेस काम किया और अपनी प्रतिभा के बदौलत नकारने वाले फिल्ममेकर को करारा जवाब दिया. इसके बाद उसके कामयाबी का जो सिलसिला शुरू हुआ बरसों तक जारी रहा. अब ये अभिनेत्री 80 साल की होने वाली हैं और उन्हें भारतीय सिनेमा का शिखर सम्मान दिया जा रहा है.
अब तक शायद आपने अंदाजा लगा लिया होगा कि ये बच्ची कौन है. अगर नहीं पहचान पाए तो बता देते हैं कि ये हैं आशा पारेख. जिन्हें 30 सितंबर को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. 2 अक्टूबर को आशा पारेख अपना 80वां जन्मदिन मनाएंगी और जन्मदिन से ठीक पहले फिल्म जगत के सर्वोच्च पुरस्कार का तोहफा भारत सरकार दे रही है.
दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए चुनी गईं आशा पारेख
हिंदी सिनेमा की सशक्त और सफल अभिनेत्री ने अपने फिल्मी करियर में एक से बढ़कर एक यादगार फिल्में दी हैं. ‘दिल दे के देखो’ ,‘कारवां’, ‘आन मिलो सजना’, ‘कटी पतंग’, ‘समाधि’, ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’, ‘लव इन टोक्यो’ जैसी फिल्मों में काम कर अपने सशक्त अभिनय क्षमता का परिचय दिया है. सिनेमा जगत में अभूतपूर्व योगदान को देखते हुए करीब 37 साल बाद किसी अभिनेत्री को दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना गया तो वह हैं आशा पारेख.
Dada Saheb Phalke Award: बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा आशा पारेख को दादा साहेब फाल्के अवार्ड दिया जाएगा.
बिमल रॉय ने आशा को बनाया था चाइल्ड एक्ट्रेस
आशा पारेख का बचपन से नृत्य का बेहद शौक था, नन्ही सी आशा को थिरकते देख मां सुधा उर्फ सलमा पारेख ने कत्थक और भरतनट्यम की शिक्षा दिलवाई. एक बार बच्ची आशा को स्टेज शो के दौरान डांस करते देख बिमल रॉय इतने प्रभावित हुए कि अपनी फिल्म ‘बाप बेटी’ में चाइल्ड एक्टर के तौर पर कास्ट कर लिया. 1954 में आई इस फिल्म ने ही आशा के अंदर अभिनेत्री बनने की ख्वाहिश जगाई थी.
आशा पारेख ने ‘बाप बेटी’ फिल्म में चाइल्ड एक्ट्रेस का रोल प्ले किया था. (फोटो साभार: Film History Pics/Twitter)
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आशा की पहली फिल्म ‘दिल दे के देखो’
कहते हैं कि आशा पारेख जब 16 साल की हुईं तो उनकी मां उन्हें प्रसिद्ध डायरेक्टर विजय भट्ट से मिलवाने ले गईं तो उन्होंने देखते ही कह दिया कि ये लड़की हीरोइन मैटेरियल नहीं है. आशा को इस बात से सदमा तो लगा लेकिन मां ने हिम्मत दी और हफ्ते भर के भीतर ही फिल्ममेकर सुबोध मुखर्जी ने ‘दिल दे के देखो’ में ब्रेक दे दिया. इस फिल्म में एक्टर थे शम्मी कपूर और डायरेक्टर थे नासिर हुसैन. 1959 में रिलीज हुई इस फिल्म ने आशा को सफल एक्ट्रेस बना दिया.
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FIRST PUBLISHED : September 29, 2022, 12:32 IST





