विनोद खन्ना (Vinod Khanna) एक ऐसे कलाकार थे जिसने तीन हिस्सों में जिंदगी को जिया. पहले फिल्मी दुनिया में जबरदस्त शोहरत हासिल की, फिर अचानक दुनिया से मोह भंग हुआ तो सब कुछ छोड़ भगवान ओशो की शरण में चले गए, वहां से लौटे तो फिर फिल्मों में काम किया. इतना ही नहीं राजनेता बने और जनता की सेवा की. 6 अक्टूबर 1946 को पाकिस्तान के पेशावर में पैदा हुए विनोद खन्ना की बर्थ एनीवर्सरी पर बताते हैं उनसे जुड़ी 10 रोचक बातें.
1-विनोद खन्ना एक बिजनेस फैमिली से ताल्लुक रखते थे. कहते हैं कि विनोद के पिता हरगिज नहीं चाहते थें कि बेटा फिल्मी दुनिया का हिस्सा बने. पिता की मर्जी के खिलाफ साल 1968 में फिल्म ‘मन का मीत’ से फिल्मी दुनिया में कदम रखा तो पिताजी आग बबूला हो गए थे. पिता-पुत्र के बीच खूब विवाद हुआ, आखिर में मां के बीच-बचाव करने पर ये तय हुआ कि फिल्मों में सफल नहीं हुए तो वापस कारोबार संभालेंगे.
2- पहली फिल्म ‘मन का मीत’ में विनोद खन्ना विलेन की भूमिका में थे. कहते हैं कि दिग्गज एक्टर और प्रोड्यूसर सुनील दत्त ने इस फिल्म में अपने भाई को बतौर हीरो लॉन्च किया था, उनका तो पता नहीं लेकिन विनोद की चल पड़ी और वे फिल्मी दुनिया में छा गए.
3-इसके बाद ‘आन मिलो सजना’, ‘सच्चा झूठा’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘मेरा गांव मेरा देश’ जैसी फिल्मों के जरिए विनोद ने दर्शकों का दिल जीत लिया. नशीली आंखों वाले फिट और हैंडसम एक्टर देखते ही देखते दर्शकों के बीच छा गए.
4- कई सफल फिल्मों में काम करने के बाद गीतांजलि से 1971 में शादी कर ली. इनके दो बच्चे अक्षय खन्ना और राहुल खन्ना हुए.
5- विनोद खन्ना ने सोलो और मल्टी स्टारर फिल्मों में भी काम किया. धीरे-धीरे विनोद की गिनती बॉलीवुड के टॉप एक्टर्स में होने लगी थी. सफलता के पीक पर पहुंचें विनोद अपने फैंस और फैमिली को जबरदस्त झटका देते हुए ओशो की शरण में चले गए.
6- विनोद खन्ना का रवैया गीतांजलि को रास नहीं आया और इनकी शादीशुदा जिंदगी भी टूट गई. 1985 में विनोद और गीतांजलि का डिवोर्स हो गया.
7- फिल्मी दुनिया का सफल एक्टर विनोद खन्ना इस तरह ओशो में लीन हुए कि ग्लैमर्स लाइफ छोड़ आश्रम में बर्तन मांजने से लेकर साफ-सफाई तक का काम करने लगे थे.
8-ओशो का आश्रम भी विनोद खन्ना को ज्यादा दिन तक बांधे नहीं रख पाया. साल 1987 में सन्यासी की दुनिया से फिर फिल्मी दुनिया में लौट आए. फिल्म ‘इंसाफ’ से बॉलवुड में कमबैक किया.
9-विनोद खन्ना ने 1990 में दोबारा घर बसाने का फैसला किया और कविता से शादी की. इस शादी से दो बेटियां साक्षी खन्ना और श्रद्धा खन्ना हुईं. विनोद की ये शादी आखिरी समय तक चली.
पंजाब के गुरुदासपुर में अपने समर्थकों के साथ विनोद खन्ना. (फोटो साभार: VINOD KHANNA/twitter)
10- फिल्मों के बाद विनोद खन्ना को राजनीति का चस्का लगा और 1997 में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली. पंजाब के गुरदासपुर सीट से चुनाव लड़े और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में संस्कृति और पर्यटन मंत्री बनाए गए. 2017 में कैंसर की वजह से विनोद का निधन हो गया.
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Tags: Birth anniversary, Vinod Khanna
FIRST PUBLISHED : October 06, 2022, 07:30 IST





