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Bhupinder Singh RIP | पंचतत्व में विलीन हुए मशहू गायक भूपिंदर सिंह, कोरोना के चलते मुंबई में रातों रात किया अंतिम संस्कार | Navabharat (नवभारत)


पंचतत्व में विलीन हुए मशहू गायक भूपिंदर सिंह, कोरोना के चलते मुंबई में रातों रात किया अंतिम संस्कार

मुंबई: एंटरटेनमेंट (Entertainment) से सोमवार रात एक दुखद खबर सामने आई। मशहूर गजल गायक भूपिंदर सिंह (Ghazal singer Bhupinder Singh) का निधन हो गया है। मुंबई के कृति केयर अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से बीमार थे। उनके निधन की घोषणा उनकी पत्नी और गायिका मिताली सिंह ने की। भूपिंदर सिंह एक प्रसिद्ध संगीतकार और मुख्य रूप से एक गजल गायक थे। उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में पार्श्व गायन भी किया है। कैंसर और कोविड से संबंधित जटिलताओं के कारण सिंगर बीमार थे। यहीं वजह है कि गायक के मौत के बाद तुरंत कुछ समय बात उनका अंतिम संस्कार किया गया। 

ANI ने इस खबर की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं। इसके साथ लिखा- ‘मशहूर गायक भूपिंदर सिंह का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए मुंबई के श्मशान घाट लाया गया। भूपिंदर सिंह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनकी पत्नी मिताली सिंह का कहना है कि वह पिछले 9 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। ‘ देखें पोस्ट- 

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भूपिंदर सिंह ने कम उम्र में ही अपने पिता से गिटार बजाना सीखा था। उनके पिता भी संगीतकार थे। बाद में वे दिल्ली चले गए जहां उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के लिए एक गायक और गिटारवादक के रूप में काम किया। 1964 में, संगीत निर्देशक मदन मोहन ने भूपिंदर को आकाशवाणी निर्माता सतीश भाटिया की एक डिनर पार्टी में गाते हुए सुना। इसके बाद उन्होंने भूपिंदर को मुंबई आमंत्रित किया और उन्हें मोहम्मद रफी, तलत महमूद और मन्ना डे के साथ ‘होके महाभारत ईश मुझे भालिया होगा’ गाने का मौका दिया। उस समय के मशहूर संगीतकार आरडी बर्मन के साथ भूपिंदर सिंह के काम ने भी खूब सुर्खियां बटोरी। चाहे ‘दिल धोता है फिर वही फुर्सत के रात-दिन..’ हो या फिर ‘घरौंदा’ फिल्म का गाना ‘दो दीवाने शहर में..’ भूपिंदर ने अपनी आवाज से इन गानों को और भी खूबसूरत और यादगार बना दिया।