Cinema

मृत्युंजय हों अमिताभ बच्चन…, जन्मदिन पर यही कामना है


साल 2005 था और अमिताभ बच्चन ने एक महीने पहले ही अपना 64वां जन्मदिन मनाया था. फिल्मी दुनिया की उनकी पारी एक बार फिर से पटरी पर लौट चुकी थी. सफलताओं का वही पुराना स्वाद वे और उनके प्रशंसक चखने लगे थे. अचानक फिर से वही समय आया जो 80 के दशक की शुरुआत में ‘कुली’ के सेट पर हुए हादसे के वक्त जन्मा था. मगर नई सदी का मीडिया ज्यादा मुखर हो चुका था. ‘कुली’ के हादसे के समय जो खबरें अखबारों के जरिये 24 घंटे बाद पहुंच रही थीं, अभी वह टीवी के जरिये पल-पल के अपडेट तक आ पहुंची थी. अमिताभ को अचानक गंभीर किस्म के पेट दर्द ने आ घेरा था.

अपने पिता हरिवंश राय बच्चन की स्मृति में आयोजित समारोह में हिस्सा लेने अमिताभ लखनऊ आए थे. वे इस पीड़ा को महीने भर से अनदेखा कर रहे थे. मगर लखनऊ आकर यह खतरनाक रूप से उपस्थिति दर्ज कराएगा, इसका अंदाजा उन्हें न था. अबकी बार अमिताभ को लगा कि अब इस दर्द को ‘इग्नोर’ नहीं किया जा सकता. यह बात उन्होंने जैसे ही अपने करीबी मित्रों को बताई, उन्हें तत्काल दिल्ली के बड़े अस्पताल ले जाया गया. मगर शुरुआती जांच में ही तथ्य सामने आ गया कि यह मर्ज कहीं अधिक गंभीर है. घरवालों को इत्तला हुई, तो उन्होंने फौरन फैसला लिया कि अमिताभ को मुंबई ले जाया जाए. मुंबई के लीलावती अस्पताल में वे भर्ती कर लिए गए. बहरहाल, अमिताभ के चाहने वालों की जीत हुई, और महानायक सकुशल घर लौट आए.

हादसों और बीमारियों का सामना करने का यह अमिताभ का पहला अनुभव नहीं था. साल 2018 में इस बेजोड़ अदाकार के एक और खुलासे ने प्रशंसकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी थीं. वह यह कि अमिताभ बच्चन को टीबी हो चुकी है! जी हां, रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के सेट पर अमिताभ ने लोगों को बताया कि उन्हें साल 2000 में उनकी रीढ़ की हड्डी में टीबी का संक्रमण पाया गया था. हालांकि उचित समय पर इलाज से वे इस खतरनाक बीमारी से उबर गए. अपने ‘अमित जी’ टीबी सर्वाइवर हैं, यह सूचना प्रशंसकों को सकते में डालने वाली थी. मगर इत्मिनान यह था कि वे ‘सर्वाइव’ कर रहे हैं. इन सबके अलावा उन्हें लिवर सिरोसिस नाम की बीमारी भी है, जिसकी वजह से उनका 25 प्रतिशत लिवर (यकृत) ही काम करता है.

सदी के महानायक, ऑल टाइम फेवरिट, मुकद्दर का सिकंदर…, और इन जैसे तमाम विशेषणों से नवाजे गए अमिताभ बच्चन फिल्मी पर्दे पर जिस हौसले के साथ नमूदार होते हैं, उसके पीछे ये खतरनाक बीमारियां होंगी, कोई कह नहीं सकता. मगर जिस अभिनेता की पहली ही फिल्म फ्लॉप हुई हो, हिट के लिए दर्जनभर फिल्मों का इंतजार करना उसके इतिहास में दर्ज हो, राजनीति से लेकर सामाजिक जीवन तक जिसके नाम से तमाम किस्से कहे जाते हों, वह ऐसा ही हीरो होता है, यह हम अमिताभ बच्चन को देखकर समझ सकते हैं.

11 अक्टूबर 1942 को जन्मे अमिताभ बच्चन का नामकरण महान कवि सुमित्रानंदन पंत ने किया था. पंत, अमिताभ के पिता हरिवंशराय बच्चन के मित्र थे. बताते हैं कि अमिताभ के जन्म की सूचना जब सुमित्रानंदन पंत को मिली तो वे बच्चे को देखने अस्पताल आए. यहां शिशु को देख उन्होंने कहा, ‘बच्चन, जरा देखो इसे, कितना शांत और ध्यानमग्न है, मानो अमिताभ हो.’ प्रकृतिप्रेमी सुमित्रानंदन पंत का दिया यह विशेषण बालक की मां तेजी बच्चन को भा गया और उन्होंने बेटे का नाम अमिताभ बच्चन रखने की ख्वाहिश जाहिर की. कवि पिता को भला क्यों न सुहाता, सो बालक का नामकरण हो गया. मगर घर में यह बालक अपने माता-पिता के लिए ‘मुन्ना’ कहलाया.

इस साल यह ‘मुन्ना’ 80 साल का हो गया है. आप अमिताभ बच्चन को दिग्गज अभिनेता कह लें या हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का चिर-यौवन महानायक, दोनों ही विशेषण उन पर फिट बैठेंगे. बीमारियां हों या उनकी जिंदगी से जुड़े किस्से या फिर विवाद, अमिताभ बच्चन सेल्युलाइड के पर्दे पर हमेशा तरो-ताजा ही दिखते रहें, यह कामना उनके लाखों-करोड़ों चाहने वालों की है. देश से लेकर विदेश तक अपनी कला के दम पर मशहूर हुए इस अभिनेता के चाहने वाले इस संसार की रीति को जानते हैं. आया है सो जाएगा, राजा रंक फकीर…! फिर भी दिली ख्वाहिश तो यही है कि अमिताभ मृत्युंजय हों. अपने प्रशंसकों के लिए, सिनेमा के लिए वे हमारे बीच हमेशा बने रहें.

जन्मदिन की शुभकामना

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