Cinema

स्मिता पाटिल हमेशा से थोड़ी विद्रोही थीं, दूरदर्शन पर समाचार पढ़ने के लिए करनी पड़ती थी खासी मशक्कत


मुंबई: स्मिता पाटिल (Smita Patil) ने मात्र 31 साल की उम्र में इतना कुछ हासिल कर लिया था जो कई एक्टर्स पूरी उम्र जीने के बावजूद हासिल नहीं कर पाते. बड़ी-बड़ी आंखों वाली सांवली सलोनी स्मिता के चेहरे में एक ऐसी कशिश थी कि जिसे देख प्रसिद्ध फिल्मकार श्याम बेनेगल ने  फिल्म ‘चरणदास चोर’ में लीड रोल के लिए कास्ट कर लिया था. स्मिता न सिर्फ कमाल की एक्ट्रेस थीं बल्कि एक सक्रिय नारीवादी एक्टिविस्ट भी थीं. महिला मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाली स्मिता ने उन्हीं फिल्मों में काम करना पसंद किया जो समाजिक परिवर्तन का सामना कर रही महिलाओं के सपनों को सिल्वर स्क्रीन पर उकेर सकें. याद करिए ‘भूमिका’, ‘मंडी’, ‘मंथन’, ‘अर्थ’, ‘आखिर क्यों’, ‘आज की आवाज’, ‘चक्र’, ‘मिर्च मसाला’ जैसी फिल्मों की स्मिता पाटिल को. महज 10 बरसों के करियर में स्मिता ने कई यादगार फिल्में सिने जगत को दी. कम समय में ही स्मिता ने वह काम कर डाला था जिसके लिए उन्हें सदियों तक याद रखा जाएगा.

पद्मश्री से सम्मानित वेट्रेन एक्ट्रेस स्मिता पाटिल 17 अक्टूबर 1955 में एक राजनेता के घर पैदा हुईं थीं. स्मिता के पिता शिवाजीराव पाटिल महाराष्ट्र सरकार में मंत्री थे और मां एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं. कह सकते हैं कि समाज को एक अलग तरह से समझने की पहली सीख स्मिता को अपने घर से ही मिली थी. शुरू से ही थोड़ी विद्रोही स्वभाव की स्मिता को हिंदी सिनेमा की बेहतरीन अदाकारा माना जाता है. स्मिता ने महिला प्रधान रोल निभा नायिकाओं के लिए एक नई राह का आगाज किया था. स्मिता ने हिंदी के साथ-साथ बंगाली, गुजराती, मराठी, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में काम किया था. हालांकि पहली बार कैमरे का सामना दूरदर्शन पर समाचार पढ़ने के दौरान ही किया था. दूरदर्शन पर न्यूज रीडर के तौर पर भी स्मिता का एक मजेदार किस्सा है.

जींस पर साड़ी लपेट पढ़ती थीं समाचार
स्मिता पाटिल बॉम्बे दूरदर्शन पर समाचार पढ़ा करती थीं. दूरदर्शन पर समाचार पढ़ने के लिए साड़ी पहनना जरूरी होता था और स्मिता को जींस पहनना अच्छा लगता था. उस समय स्मिता जींस ही पहनती थी और साड़ी पहनने में सहज महसूस नहीं करती थीं. हालांकि इसका भी एक शानदार उपाय स्मिता ने निकाल लिया था. स्मिता अक्सर स्टूडियों पहुंचती तो जींस पहनकर ही लेकिन उसके ऊपर ही साड़ी लपेट कर बिल्कुल गंभीर भाव भंगिमा के साथ समाचार पढ़ने के लिए रेडी हो जाती थीं.

अपने किरदार में पूरी तरह डूब जाती थीं स्मिता पाटिल
स्मिता पाटिल थियेटर में भी काफी एक्टिव थीं. एक्ट्रेस ने सन 1975 में प्रसिद्ध फिल्मकार श्याम बेनेगल की  फिल्म ‘चरणदास चोर’ से फिल्मी करियर शुरू किया था. पर्दे पर गंभीर अदाकारी के लिए प्रसिद्ध एक्ट्रेस अपनी पर्सनल लाइफ में काफी जिंदादिल थीं, लेकिन जैसे ही कैमरा के सामने आती और एक्शन सुनते ही पूरी तरह से फिल्म के कैरेक्टर में समा जातीं. श्याम बेनेगल ने एक बार स्मिता को याद करते हुए बताया था कि ‘वो जो भी करती, उस रोल में ढल जाती थीं. एक बार हम मंथन फिल्म की शूटिंग राजकोट से बाहर कहीं कर रहे थे. शूटिंग के दौरान स्मिता गांव की औरतों के साथ उन्हीं जैसे कपड़े पहनकर बैठी हुई थीं. तभी वहां फिल्म की शूटिंग की देखने कॉलेज के कुछ स्टूडेंट आए और उन्होंने पूछा फिल्म की हीरोइन कहा हैं ? किसी ने स्मिता की तरफ इशारा किया तो उस छात्र ने हैरानी जताते हुए कहा कि क्या तुम मजाक कर रहे हो..ये गांव की औरत फिल्म की हीरोइन कैसे हो सकती है ?’

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स्मिता पाटिल अपने किरदार में डूब जाती थीं. (फोटो साभार:_prat/Instagram)

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स्मिता पाटिल मात्र 31 साल में दुनिया छोड़ गईं
ऐसी करिश्माई व्यक्तित्व की मालकिन स्मिता को इश्क भी हुआ तो ऐसे शख्स से जो पहले से ही शादीशुदा थे. फिल्म ‘भीगीं पलके’ की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात राज बब्बर से हुई. मुलाकात प्यार में बदला और दोनों ने साथ रहने का फैसला कर लिया. इनके प्यार की निशानी एक बेटा प्रतीक बब्बर है, जो अब फिल्म इंडस्ट्री का ही हिस्सा हैं.

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